
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता… लेकिन भारत-इजरायल मीडिया OUT! आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है? मिडिल ईस्ट के सीजफायर के बाद जहां दुनिया को लगा था कि अब कूटनीति का मंच खुलेगा, वहीं पाकिस्तान ने एंट्री गेट पर ही “Access Denied” का बोर्ड टांग दिया। इस्लामाबाद में हो रही हाई-प्रोफाइल ईरान-अमेरिका बैठक से भारतीय और इजरायली पत्रकारों को बाहर रखने का फैसला ऐसा है, जैसे मैच हो वर्ल्ड कप का… और कैमरे बंद कर दिए जाएं। सवाल सीधा है—क्या पाकिस्तान सिर्फ मेज़बान है या कहानी का एडिटर भी बन बैठा है?
‘इस्लामाबाद वार्ता’ या ‘Selective Transparency’?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बड़े गर्व से इस मीटिंग को “इस्लामाबाद वार्ता” नाम दिया। लेकिन जैसे ही मीडिया कवरेज की बात आई, नियम बदल गए। भारत और इजरायल के पत्रकारों को बाहर रखना सिर्फ सिक्योरिटी का मामला नहीं लगता—ये “Selective Transparency” का क्लासिक केस दिख रहा है। क्योंकि जब पूरी दुनिया देख रही हो, तब कैमरा एंगल चुनना ही असली पॉलिटिक्स बन जाता है।
ग्लोबल स्टेज पर ‘फिल्टर’ क्यों?
इस बैठक में ईरान और अमेरिका जैसे दो बड़े खिलाड़ी आमने-सामने हैं। एक तरफ Abbas Araghchi और Mohammad Bagher Ghalibaf जैसे चेहरे हैं, तो दूसरी तरफ JD Vance और Steve Witkoff जैसे दिग्गज।
अब ऐसे मंच से अगर कुछ देशों के पत्रकारों को बाहर रखा जाता है, तो यह सवाल उठना लाजमी है—क्या कुछ ऐसा है जो दुनिया को नहीं दिखाना चाहते?
‘डिप्लोमैसी’ या ‘डैमेज कंट्रोल’?
राजनीति में अक्सर जो दिखता है, वो होता नहीं… और जो होता है, वो दिखता नहीं। पाकिस्तान का यह फैसला कहीं “डैमेज कंट्रोल” तो नहीं? क्योंकि भारत और इजरायल—दोनों ही देश इस पूरे मिडिल ईस्ट समीकरण में सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके मीडिया को दूर रखना मतलब—नैरेटिव पर पूरा कंट्रोल रखना।

सरल भाषा में कहें तो—“Breaking News को पहले एडिट करो, फिर दुनिया को दिखाओ।”
शक की सुई पाकिस्तान पर क्यों?
इस फैसले के बाद इंटरनेशनल सर्कल में पाकिस्तान पर सवाल उठने लगे हैं। क्या यह सुरक्षा का मुद्दा है? या फिर कुछ ‘अनकम्फर्टेबल’ सवालों से बचने की कोशिश? या फिर पूरी मीटिंग को एक तय स्क्रिप्ट के मुताबिक चलाने का प्लान? जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं… लेकिन शक की सुई सीधी इस्लामाबाद की तरफ घूम रही है।
‘खबर कम, कंट्रोल ज्यादा’
अगर न्यूज़रूम स्टाइल में कहें तो— “Breaking News ये नहीं कि मीटिंग हो रही है… Breaking News ये है कि कौन देख सकता है और कौन नहीं!” कूटनीति के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पाकिस्तान ने खुद को होस्ट से ज्यादा ‘Gatekeeper’ बना लिया है। अब देखना ये है कि इस मीटिंग से शांति निकलती है या फिर एक और विवाद।
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